दोस्तों पेश करता हम एक ताज़ी ग़ज़ल और तस्वीर,
आपके प्रतिभाव की प्रतीक्षा सह….
एक झलक जिसने भी पायी आपकी
जिंन्दगी कैसे जीये आरामकी
जिंन्दगी कैसे जीये आरामकी
जो कला पहुचे नही उनके कदम
खाख है ऐसी कला बस नामकी
लोग कहते है मुहब्बत है हमें
है बला बर्बाद, है क्या कामकी
रातका तारा तू सपना भोर का
तू सुबह मेरी शफक तू शामकी
मेंरी नझरो से उन्हें देखे कोई
क्या पड़े उनको जरूरत जामकी
ख़ुदकुशी हो गई ख़ुशी ना पाई तो,
बात हमने ख़ास की ना आम की
प्यार से पायी ये हमने ज़िन्दगी
प्यारने ही ज़िन्दगी तम्माम की
रात तकती राह, मिलने आयेगा
ज़िन्दगी ‘दिलीप’ तेरे नाम की
खाख है ऐसी कला बस नामकी
लोग कहते है मुहब्बत है हमें
है बला बर्बाद, है क्या कामकी
रातका तारा तू सपना भोर का
तू सुबह मेरी शफक तू शामकी
मेंरी नझरो से उन्हें देखे कोई
क्या पड़े उनको जरूरत जामकी
ख़ुदकुशी हो गई ख़ुशी ना पाई तो,
बात हमने ख़ास की ना आम की
प्यार से पायी ये हमने ज़िन्दगी
प्यारने ही ज़िन्दगी तम्माम की
रात तकती राह, मिलने आयेगा
ज़िन्दगी ‘दिलीप’ तेरे नाम की
-दिलीप गज्जर

रचना अच्छी है.बेहतर हो सकती है
कुछ इस तरह
जिससे मेरी हर सुबह हंसी,वो आफ़ताब है तू .
मेरे सोख से रात का,महताब है तू.
जिसके खिलने सेदिल का गुलशन महके,
वो गुलाब है तू.
मेरे रूप पे जो छाया,वो सबाब है तू.
हर पल जो सजते हैं आँखों में,वो रंगीन ख्वाब है तू.
આદરણીય દિલીપભાઈ આપશ્રી ની આ રચના ખુબજ ગમી.આ જ જીદગી ની કમાલ છે પ્યાર સે પાઈ જીદગી પર પ્યાર ને હી તમામ કી …..શુભેછા સહ.
एक सुंदर रचना! आपकी रचना के अव्वल तीन मिस्रे वजन-बहर में है.(गागागा-गागागा-गागा-गालगा). लय भी मौजूद है रदीफ काफियह खूब निभाया है..काश पुरी गझल वजन पर होती.अभी आपने चार चंद लगा दियें है.कुछ सूरज भी लग जाते.तम्माम की जगह तमाम ही सही लफ्ज है.
क्षमायाचना कि साथ.
——मुहम्मदअली वफा
Shukriya..Wafa sahab aapki islaah ke liye..
एक झलक जिसने भी पायी आपकी, जिंन्दगी कैसे जीये आराम की
वाह दिलीपभाई .. वफाभाई की बात सही है .. छंद में थोडी गडबड है ।
Daxeshbhai..aabhari hu aapne jo suchan diya..
very good poem…………you may publish in KAVITAKOSH
if we can write Sanskrit in Gujarati why not Hindi??
wah maza aavi
good gazal
ek jhalak …………. kaise jiye …..aaram kee isme aaram sabd kuch jam nahi raha
આપની ક્રુતિ સુંદર લાગી. ધન્યવાદ …. રસાસ્વાદ કરાવતા રહેશો .
દશરથલાલ રાવલ
વિસનગર
Thnaks to,Pragnanju, Bharat Sachania, Daxesh,Saral Hindi, Stonmonster,Lataben, Dasharathlal..for comment.
વાહ વાહ સરસ પ્રયાસ દીલિપભાઇ….પણ મારે તો આનુ સિંગીંગ અને તે પણ તમારે કંઠે સાંભળવુ છે…તો શુ કરુ ?? જવાબ આપજો….બાય
શ્રી માનનીય જગતાપભાઈ, આપનો પ્રતિભાવ ને ગાવાના પ્રોત્સાહન બદલ આભારી છું.
વાહ દિલિપભાઇ,
ખુબજ સુન્દર રચના… ખુબ ખુબ આભાર આપના બ્લોગ પર મુક્વા..સાથે ખુબજ સુન્દર ગાયકી… ખરેખર મજા આવી ગઇ..!
શ્રી પ્રકાશભાઈ, સહજ રીતે જે થયુમારી નીપૂણતા હતી..તે ધરી.. તે વહેંચી ગમતાનો ગુલાલ કર્યો..આપનો આભાર..
Ritajee through mail to me
show details 12 Jan (1 day ago)
વાહ…..ખુબ સરસ ……
Thanks Dear Ritajee..
प्यार से पायी ये हमने ज़िन्दगी
प्यारने ही ज़िन्दगी तम्माम की
………………………..
શ્રી દિલીપભાઈ
પ્રેમભરી આ ગઝલમાં આગવી છાંટ છે. એક આલ્બમમાં શોભી તેવી
ઉત્તમ કૃતિ છે અને જેમ જેમ માણીએ તેમ વાહ! બોલી જવાય છે.
ખૂબ ખૂબ અભિનંદન.
રમેશ પટેલ(આકાશદીપ)
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