उन्नत मानव जीवन-दिलीप गज्जर

उन्नत मानव जीवन
मानवताका   बीज  हृदयमे   जब   अंकुरित  होता   है
सृष्टिबागमे   मानव  जीवन   तब  विकसित   होता  है
चित्त  वृत्तिके   रंगीन   पत्ते  पतजड़में  गिर जाते  फिर
नए  गुणों  की बहारसे तरु   नवपल्लवित   होता   है
कृतज्ञता  और  भाव पूर्णता,  कार्य प्रवणता, अस्मिता
दैवी  गुणसे   मानव   सच्चा  मानव  साबित  होता  है
ऊँची डिग्री नौकरी  अच्छी  जिससे  कमाई  ज्यादा  हो
जिव जगत जगदीश जानकर कौन सुशिक्षित  होता  है
मेरा  कुछ  भी  है  कहा  निर्लेप   करम  बस  भक्त  करे
इश्वर  से  पाया   जानकर   इश्वरको  अर्पित  होता   है
दुर्गुण  की  दुर्गंघ  छुपाने   दम्भी  चेहरा   खूब  सजाया
शीलकी   शुश्बुसे  ही   मानव   गौरवान्वित  होता   है
पथ्थर  पर ही  झूकने पर   दिल  पथ्थर  जैसा  हो  गया
दिलका  साज  बजे  तो  जीवन प्यारका गीत  होता है
सबकुछ  होने पर  भी  जीवन  झुठा  सपना  लगता  है
ढाई   अक्षर  कहनेवाला ही  एक मनमीत   होता   है

दिलीप गज्जर

Kankaria lake, Amdavad
photo DGajjar
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4 thoughts on “उन्नत मानव जीवन-दिलीप गज्जर

  1. दैवी गुणसे मानव सच्चा मानव साबित होता है
    સરસ વિચારોથી શોભતી સ્મરણિય રચના રાષ્ટ્રભાષામાં.

    અભિનંદન ,શ્રી દિલીપભાઈ
    રમેશ પટેલ(આકાશદીપ)

  2. दिलीपभाई बहोत ही अच्छी कविता लीखी है..आपने जो लिखा बिलकुल सच है..और आपका जोश समाजमे फरक ला सकता है.ऐसे ही जोशमे रहे है.और अपने विचार से दुनियामे फर्क लाये..मेरी दुआये आपके साथ है..
    यह सपना ही तो है जो कलका होसला देता है,
    सपनोसे ही मानव जीवन सलोना रेहता है.
    सपना

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