मौत एक कविता बनेगी

एक दिन हमतुम मिलेंगे तुम फिकर करना नहीं 
फूल कांटोमे भी खिलते आह तुम भरना नहीं

क्या अभी करती हो तुम मै गीत गाता सोचता, 
खुश रहेना तुम सदा उदास मन करना नहीं 

प्यार के तेरे सहारे झिन्दगी ये जा रही 
भर दिया दिलका ये सागर और कुछ भरना नहीं

रागद्वेषो के झहर, यमुना विषैली हो गई
विश्वमें मानव्यता सा कोई भी झरना नहीं

प्यार देना प्यार लेना, प्यार से जग देखना
हो सके इन्सान बनना और कुछ करना नहीं

ध्यान है तो है सभी कुछ, घ्यान ना तो कुछ नही
तु जो है तो है सभी कुछ, और कुछ स्मरना नही

कोई भला बुरा समझता कोई दिवाना दंभी पर
बंदे से कहता खूदा परवाह तुं करना नहीं

इस जमीं पर हो न हो तु कल्पनाकी है परी !
यह कविकी कल्पनाका ध्यान कुछ धरना नहीं

झिन्दगी को पानेकी किंमत दिलीप पहचान ले,
मौत एक कविता बनेगी मौत से डरना नहीं
-दिलीप गज्जर

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19 thoughts on “मौत एक कविता बनेगी

  1. श्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता :: :: मौत से ठन गई
    સ રસ
    યાદ આવી
    श्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता
    जूझने का मेरा कोई इरादा न था,
    मोड़ पर मिलेंगे इसका कोई वादा न था,

    रास्ता रोककर वह खड़ी हो गई ।
    यों लगा जिंदगी से बड़ी हो गई।

    मौत की उम्र क्या दो पल भी नहीं,
    जिंदगी-सिलसिला, आज कल की नहीं,
    मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,
    लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं

    तू दबे पाव, चोरी-छिपे से न आ,
    सामने वार कर, फिर मुझे आजमा,
    मौत से बेखबर, जिंदगी का सफर,
    शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

    बात ऐसी नहीं कि कोई गम ही नहीं,
    दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं
    प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
    न अपनों से बाकी है कोई गिला।

    हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए,
    आंधियों में जलाएं हैं बुझते दिए,

    आज झकझोरता तेज तूफान है,
    नाव भंवरों की बाहों में मेहमान है।

    पार पाने का कायम मगर हौसला,
    देख तूफां का तेवर तरी तन गई,
    मौत से ठन गई।

  2. આદરણીય દિલીપભાઈ આજે હું તમો ને સલામ ભરું છું આદરણીય અટલજી એક એવા મહાન પુરુષ છે કે તેઓ એ પોતાનું સમ્ગ્રહ જીવન દેશ માટે અર્પણ કર્યું આજે તેઓ ની યાદ અપાવી ને મને ધન્ય કર્યો આ ૨૧મિ સદી નો વીર પુરુષ છે તમો એ તેઓ ની કવિતા પીરસી ને દેશભક્તિ નું કાર્ય કર્યું છે અટલજી ને રૂબરૂ મળવા માત્ર થોડી મિનીટ હું મોડો થયો તમો ને જાણી ને આનદ થશે કે જામનગર ની એક ખાનગી મુલાકાતે તેઓ આવ્યા હતા ત્યારે તેઓ વિનુભાઈ ની ઓફીસ જે સુપર માર્કેટ જામનગર માં હતી ત્યાં આવી ગયા છે.શુભેછા સહ.

    • શ્રી ભરતભાઈ આપ ભાગ્યશાળિ છો કે ભારતના ભૂતપૂર્વ વડાપ્રધાન વિનુભાઈ ની ઓફિસે આવી ગયા..પ્રગ્નાજુંજી એ એમની કવિતા અહી રજુ કરી છે..પ્રતિભાવની..અભિભવાત..( સાંખ્યકારિકા )ના કારને મારી કવિતા ઢંકાઈ ગઈ..જેમ સૂર્યના પાછળ તારા..પણ કશો વાંધો નહિ આપનો ભાવ હું સમજી શકુ છું..

  3. बहोत अच्छी कविता है….अभिनंदन..
    ध्यान है तो है सभी कुछ, घ्यान ना तो कुछ नही
    तु जो है तो है सभी कुछ, और कुछ स्मरना नही बहोत खूब..

    • आदर्णिय सपनाजी, आपको मेरी कविता पसंद आई और एक पन्क्ति भी कोट कि,…ध्यान मेरा प्रिय है और विषय है..वो..वैसे ध्यानं निर्विषयं मनः कहा है..मगर द्वैत आते उसकी याद आ जाती है..

  4. माननीय महोदय श्री दिलीपजी

    प्यार देना प्यार लेना, प्यार से जग देखना
    हो सके इन्सान बनना और कुछ करना नहीं

    आपके इस मनभावन श्ब्दोसे सजाई हुई इस कविता मानव जीवनको

    एक अनोखा सन्देश देती हे . अगर आपके हर शब्दको मानव पानीकी

    तरह पि जाए तो विश्व कुटुब कल्याणकी भावनाए उजागर हो जाएगी.

    आपकी और आपनी कविताकी सराहना करता हु. धन्यवाद.

  5. પિંગબેક: » मौत एक कविता बनेगी » GujaratiLinks.com

  6. प्यार देना प्यार लेना, प्यार से जग देखना
    हो सके इन्सान बनना और कुछ करना नहीं

    ध्यान है तो है सभी कुछ, घ्यान ना तो कुछ नही
    तु जो है तो है सभी कुछ, और कुछ स्मरना नही

    વાહ, આ બંને શેર ખુબ ગમ્યા … તમારા વ્યક્તિત્વ અને ચિંતનની ઝલક આપે છે.

  7. વાહ વાહ……વાહ વાહ……
    શું શબ્દો વાપરીયા છે અંકલ
    ખુબજ સારી રચના છે.

    છેલ્લે બસ એટલુજ કહું…….

    ” જબ સે સુના હે જીંદગી મૌત કા નામ હૈ
    તબ સે દર પે બૈઠ કે કાતિલ કો ઢુંઢતા હું “

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