ये रातें, ये मौसम,….

प्यारे दोस्तों आपके सामने एक हिंदी युगल गीत पेश करता हुँ आशा है पसंग आयेगा

Ye Raate Ye Mosam Nadi ka kinara

Cover by Dilip Gajjar and Chetu Ghiya Shah

Film: Dilli Ka Thug,(1958) Singer: Kishor Kumar & Asha Bhonsle, Lyrics: Shailendra, Music by Ravi

ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा, ये चंचल हवा
कहा दो दिलों ने, के मिलकर कभी हम ना होंगे जुदा

ये क्या बात है, आज की चाँदनी में
के हम खो गये, प्यार की रागनी में
ये बाहों में बाहें, ये बहकी निगाहें
लो आने लगा जिंदगी का मज़ा

सितारों की महफ़िल नें कर के इशारा
कहा अब तो सारा, जहां है तुम्हारा
मोहब्बत जवां हो, खुला आसमां हो
करे कोई दिल आरजू और क्या

कसम है तुम्हे, तुम अगर मुझ से रूठे
रहे सांस जब तक ये बंधन ना टूटे
तुम्हे दिल दिया है, ये वादा किया है
सनम मैं तुम्हारी रहूंगी सदा

गणनायकाय गणदैवताय,

Voca cover and track, recording and digitally  mastered by Dilip Gajjar

original music and composition by Shankar Mahadevan.

गणनायकाय गणदैवताय, गणाध्यक्षाय धीमहि 

गुण शरीराय गुण मंडिताय, गुणेशानाय धीमहि 

गुणातीताय, गुणाधीशाय, गुण प्रविष्ठाय धीमहि
एक दंताय, वक्रतुंडाय, गौरीतनयाय धीमहि
गजेशानाय, भाल चन्द्राय, श्रीगणेशाय धीमहि

गान चतुराय गान प्रानाय, गानान्तरात्मने
गानोत्सुकाय गानात्मनाय, गानोत्सुकमनसे
गुरुपूजीताय, गुरुदैवताय, गुरुकुलध्वाइने
गुरुविक्रमाय गुह्यप्रवराय गुरुवे गुणगुरुवे
गुरुदैत्येकलछेत्रे गुरुधर्म सदा राध्याय
गुरुपुत्रपरित्राते गुरुपाखंड खंडकाय
गीत साराय, गीततत्वाय, गीत गोत्राय धीमहि
गूढ़ गुल्फाय गंधमत्ताय गोजयप्रदाय धीमहि

ग्रंथगीताय ग्रंथगेयाय ग्रंथान्तरात्मने
गीतलीनाय गीताश्रयाय गीतवाद्यपटले
गेय चरिताय गाय गवराय गन्धर्वभिकृते
गायगाधीन विग्रहाय गंगाजल प्रणयवते
गौरीस्तनंदनाय गौरीह्रदयनंदनाय
गौरीभानुसुताय, गौरी गणेश्वराय
गौरी प्रणयाय गौरी प्रवणाय, गौरभावाय धीमहि
गौ सहस्राय, गोवर्धनाय, गोपगोपाय धीमहि
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‘મહેકતું ગુજરાત’ Audio

પ્રિય મિત્રો, આપની સમક્ષ ગુજરાતના 52 મા સ્થાપના દિને વિશેષ

કવિ મિત્ર  શ્રી રમેશભાઈ ‘આકાશદીપ’ની  ‘મહેકતું ગુજરાત’ રચના રજુ કરતા આનંદ થાય છે

ગાજે મેહૂલીઓ ને  સાવજની દહાડ,

 જાણજો એજ મારું વતન ગુજરાત’

રજૂઆત- ચેતુ ઘીયા  શાહ
ગાયકો- દિલીપ ગજજર  અને રોશની શેલત (અમદાવાદ )
સંગીતકાર- નારાયણ ખરે, અમદાવાદ, ગુજરાત
આપના પ્રતિભાવ આવકાર્ય
sardaardg Blg

પ્રેમ છે તે તું જ છે

મિત્રો,અમારી ૨૫ મી એનીવર્સરી નિમિત્તે આ ગીત રજુ કરુ છું
કંપોઝ- બ્રીજ જોષી
ગાયન-હસુ ગોહીલ
રચના/વિડીઑ- દિલીપ ગજજર

ચંદ્રમા વધતો રહે ને ચન્દ્રમાં ઘટતો રહે
પ્રેમ એવો આપનો છે જે સતત વધતો રહે
એક તારી ડાળ પરથી મોરનો ટહુકો ઉઠે
હું મટીને તું હી તું હી, નામ બસ રટતો રહે
લાખ જન્મોની સફરમાં નાવ કિનારો ચહે
પ્રેમમાં તારો ડુબેલો સાગરો તરતો રહે
કૈંક ખોતા કૈંક મળશે ભાવની આ સંપદા
જિન્દગીની આપદામાં તું સદા હસતો રહે
પ્રેમ છે તે તું જ છે ને તું જ છે તે પ્રેમ છે
પ્રેમરુપે તુજમહીં થી ‘તે’ સતત મળતો રહે
હા, પ્રિયાની યાદમાં આ વિશ્વને ભૂલી, દિલીપ
રોજ બસ તેની જ ગઝલો ગાઈને ફરતો રહે

भोले ओ भोले / मैत्रीभाव भरा गीत

મૈત્રીનું મુલ્ય જીવનમાં અનેક ગણું ઉંચું છે .. જેના જીવનમાં મિત્ર નથી એ ક્યારેય મૈત્રીના મહત્વને સમજી ના શકે .. જીવનરૂપી બાગમાં મિત્ર એ સુંદર ફૂલ છે, જેની મૈત્રીની મહેકથી જીવન મહેકી ઉઠે છે .. પરંતુ અગર જો મૈત્રીનું ફૂલ મુરઝાયું તો જીવન પાનખર સમું દિસે છે.. આ ગીતમાં પણ, એક મિત્ર ની નારાજગીથી બીજો મિત્ર વિહવળ બની શંકર ભગવાનને પ્રાર્થના કરે છે… મૈત્રીના એ ફૂલને ફરી ખિલવવા અર્ચના કરે છે ..આ ગીતને સ્વ. કિશોરદાએ સ્વર આપેલ .. અને અત્રે પ્રસ્તુત ગીતમાં મિત્ર શ્રી દિલીપભાઈએ ખૂબ જ સરસ ભાવ વહી સ્વર વહાવ્યો છે … ! -ચેતુબેન ચાહ

रुठा यार फीरसे मनाना पडेगा
मधुर प्रितका गीत गाना पडेगा
मै मन्दिर तो युं रोज जाता नही पर
तेरे दर पे सर अब झुकाना पडेगा
-दिलीप

भोले ओ भोले तू रूठा दिल टूटा
मेरे यार को मिला दे वो प्यार फिर जगा दे २

क्या होगा फिर तेरा गौरी जो रूठ जाये
शंकर तेरे माथे का चंदा जो टूट जाये
दम दम दम डमरू ना बाजे
बम बम बम फिर तू ना नाचे
यार अगर ना माने मेरे यार को…….

वो बिछड़ा तो कसमसे फिर में ना जी सकूँगा
मेरे भोले तेरे जैसे मैं ज़हर ना पी सकूँगा
जिस्म हू में वो जाँ है मेरी
उसको नहीं पहेचान है मेरी
प्यार मेरा तूँ जाने मेरे यार को …..

Film: Yarana (1981)
Originally sung by Kishorkumar

Music Director: Rajesh Roshan

ज़िन्दगी के सफरमे,भावांजलि

‘टाईम हो गया है ! पेक अप’
वो तो सो गया है ! पेक अप
कब आनंद मरते है ? बोलो
दिलमें बस गया है ! पेक अप

Dilip Gajjar Presenting…Zindgi ke Safarme..

प्यारे मित्र की फरमाइश से, राजेश खन्नाको भावांजलि  पेश करता हूँ आपके प्रतिभाव की आशा सह 

ज़िन्दगी के सफरमे गुजर जाते है जो मकाम

वो फिर नहीं आते,  वो फिर नहीं आते
ज़िन्दगी के सफरमे गुजर जाते है जो मकाम

वो फिर नहीं आते,  वो फिर नहीं आते

फूल खिलते है, लोग मिलते है ….फूल खिलते है, लोग मिलते है मगर

पतजड़में जो फूल, मुरज़ा जाते है
वो बहारोके आने से खिलते नहीं
कुछ लोग एक रोज जो बिछड़ जाते है
वो हजारोके आने से मीलते नहीं
उम्रभर चाहे कोई पुकारा करे उनका नाम
वो, फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते
आँख धोखा है, क्या भरोसा है…..आँख धोखा है, क्या भरोसा है सुनो
दोस्तो शक दोस्ती का दुश्मन है
अपने दिलमे इसे घर बनाने ना दो
कल तड़पना पड़े यादमे जिनकी
रोक लो रूठकर उनको जाने दो
बादमे प्यारके चाहे भेजो हजारो सलाम
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते
सुबह आती है, रात जाती है…..सुबह आती है, रात जाती है युही
वक्त चलता ही रहता है रुकता नहीं
एक पल में ये आगे निकल जाता है
आदमी ठीक से देख पाता नहीं
और परदेपे मंजर बदल जाता है
एक  बार चले जाते है जो दिन रात सुबह शाम
वो,… वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते
ज़िन्दगी के सफरमे, गुजर जाते है जो मकाम,     वो फिर नहीं आते,    वो फिर नहीं आते
Digital Illustration & Sung by Dilip Gajjar

दिए जलते है , मित्रताके

प्यारे दोस्तों, आपके सामने पेश करता हू हाल ही में गाया हुआ ये भावगीत आशा है आपको पसंद आएगा 
दोस्ती या मैत्रीका मूल्य कितना कीमती है यह अहसास होने लगता है ..
रेकोर्डिंग और मास्टरिंग किया है  लंदन स्थित मित्र जतिन आर्य ने 
उम्मीद है आप अपना कीमती वक्त निकालकर सुनेंगे और हमेशा की तरह होसला बढ़ाएंगे 
हेडफोन से बेहतर साउंड सुन सकते है जो की पि  सी के छोटे  स्पीकरसे न सुनाई दे 
दिलमें  मित्रताके दिये..

एक दिन नहीं, सप्ताह नहीं, महिना नहीं,  अयन नहीं साल नहीं, जीवनभर जलते रहें यही शुभ कामना है 

दिए जलते है , फुल खिलते है ……..२ 

बड़ी मुश्किल से मगर, दुनियामे दोस्त मिलते है …२ 

जब जिस वक्त किसीका, यार जुदा होता है 
कुछ ना पूछो यारो दिलका, हाल बुरा होता है ….२ 
दिल पे यादो के जैसे, तीर चलते है ..आ हा हा …
दिए जलते है , फुल खिलते है ……..

बड़ी मुश्किल से मगर, दुनियामे दोस्त मिलते है …
दिए जलते है ……

दौलत और जवानी, इक दिन खो जाती है 
सच कहता हू, सारी दुनिया दुश्मन हो जाती है …२ 
उम्रभर दोस्त लेकिन साथ चलते है …उ हू हू ….
दिए जलते है , फुल खिलते है ……..

बड़ी मुश्किल से मगर, दुनियामे दोस्त मिलते है …
दिए जलते है …….

इस रंग रूप पे देखो, हरगिज़ नाज़ ना करना 
जाँन  भी मांगे यार तो दे देना, नाराज ना करना …२ 
रंग उड़ जाते है, रूप ढलते है 
दिए जलते है , फुल खिलते है ……..२ 

बड़ी मुश्किल से मगर, दुनियामे दोस्त मिलते है …२ 
गीतकार आनंद बक्षी
किशोरकुमार
राहुल देव बर्मन

यही जिन्दगानी-शरत मल्होत्रा

SHARAT MALHOTRA SINGS AND COMPOSES “DILIP GAJJAR’S LOVELY LYRICS ALL THE WAY FROM UNITED KINGDOM, SHARAT LIVES IN TEXAS USA AND THIS COLLABORATION HAPPENED KIND COURTESY FACE BOOK, PLEASE ENJOY THIS LOVELY MELODY AND SEND US YOUR VALUABLE COMMENTS, WE REALLY APPRECIATE THAT AS THAT WILL HELP US DEVELOP INTO BETTER ARTISTS. THANKS
 — with Kim NarayanNishit JoshiJanak M DesaiDilip Gajjar and Nerwin Sandhu at RICHMOND STUDIOS (COPYRIGHT USA GBX 394638 BLUE LABEL RECORDS).

प्यारे दोस्तो, बहोत ही खुशी के साथ आपके सामने पेश करता हुं गझल, यही जिन्दगानी…जो कि हाल ही मेरे प्रिय शरतजी मल्होत्राने कंपोझ कर गाई और रेकार्ड की है..
उम्मिद है आपको पसंद आये और कलाकार का होंसला बढाते प्रतिभाव दे..यही भावना के साथ शेर करते है…
टेक्सास यु एस स्थित..शरतजी मल्होत्रा बहोत ही अच्छे कंपोझर है और रेकोर्डींग भी स्टुडिओमें करते है..उनका संगीत, गायीकि भीतर की गहराइओ को छु जाता है और हर शब्द मे जां भर देता है उनका मे दिल से धन्यवाद देता  हुं और अभिनंदन भी कि उनकी ये कला उतरोत्तर बढती जाये और उंचाइके  हर शीखर सर करती जाये…
-दिलीप

तुझे प्यार करना, तेरा प्यार पाना, यही िजन्दगानी
तेरी प्रीतका एक, मधुर गीत गाना, यही जिन्दगानी

यहांकी हरेक चीज, आनी है जानी, और फानी है फीर भी,
समन्दरमें गहरे, मुझे डुब जाना, यही जिन्दगानी

नजरको मिलाकर सभी गम भूलाकर ईसी पलमें जी लुं
नही सांसोका है कोई भी ठिकाना यही जिन्दगानी

सभीकुछ अधुरा, अलग था थलग था, मधुर अब सभीकुछ
िपयाके मिलनसे ना कुछ भी पुराना यही जिन्दगानी

चमनमें बहारे ,तो आती है जाती, खुशी और खीजांकी
फूलोसे ही सीखा सदा मुस्कुराना यही जिन्दगानी

यहा भीड है फीर भी सूने नगरकी सीमा पार करके
गगनमें जा उडना ऊत्सव मनाना यह िजन्दगानी

रहे बहता निर्झर सा जीवन तुम्हारा परम लक्ष पाने
ये अवसर मिला है ना यूही गवानां यही जिन्दगानी
DILIP GAJJAR

Image edited by Dilip Gajjar

ટૂંકી ટચરક વાત, કબીરા Video

સાહિત્ય મિત્રો, એકાદ વર્ષ પહેલા મને તેમને આપેલી રચના તૈયાર થતાં આપ સમક્ષ રજુ કરું છું કવિમિત્ર ચન્દ્રેશ મકવાણાની તાજેતર માં જ ગવાયેલ પ્રસિધ્ધ રચના.
આશા છે આપને ગમશે. આપના પ્રતિભાવ પ્રોત્સાહક,સૂચન બની રહેશે..

ટૂંકી ટચરક વાત, કબીરા,
લાંબી પડશે રાત, કબીરા.

અવસર કેવળ એક જ દિ’નો,
વચ્ચે મહિના સાત, કબીરા.

ખુલ્લમખુલ્લી પીઠ મળી છે,
મારે તેની લાત, કબીરા.

કાપડ છો ને કાણી પૈનું,
પાડો મોંઘી ભાત, કબીરા.

જીવ હજીએ ઝભ્ભામાં છે,
ફાટી ગઈ છે જાત, કબીરા.

– ચંદ્રેશ મકવાણા ‘નારાજ’

With young poet friends, Bhavesh Bhatta,Chandresh Makavana, Anil Chavda, at Babu Khare’s house Kankariya,Ahmedabad. Nov.2011.

ગઝલપાઠ-જ.મુહમ્મદઅલી વફા

મિત્રો, આપની સમક્ષ રજુ કરું છું.. એક ગુજરાતી ગઝલ હાલના સંભારણારુપે. જ. મુહમ્મદઅલી વફા જેઓ કેનેડાથી પધારેલ. મારા બ્લોગના પ્રારંભાર્થે તેમનું માર્ગદર્શન પાયારુપ હતું. તેમના સંગ્રહ કોને મળું ? નું ટાઇટલ બનાવવાનો મોકો મળ્યો તે માટે પણ આભારી છું.અમારી પ્રથમ મુલાકાત ૨૦૦૮ માં બોલ્ટન મુશાયરામાં થયેલ ત્યાર બાદ તાજેતરમાં તેઓ મારા ઘરે પધાર્યા  સાહિત્યગોષ્ઠી થઈ તે આનંદની ઘટના બની રહી…

ગઝલ-
અમારા દર્દ સાથે આપનું સગપણ લખી દેજો
અમે માની જઈશું કોઈ પણ કારણ લખી દેજો.
અમારી પ્યાસ થોડી વ્યગ્ર રહેશે તો મજા પડશે
નદીના શુષ્ક પટપર બને તો રણ લખી દેજો
અમે તો આમ પણ બળતા રહીશું આ ચમનમાંહે
પથારી છે બધી કાંટા ઉપર લક્ષણ લખી દેજો
હતો લાચાર રસ્તો એકનો કુરબાની બીજાની
બને તો રામની સાથે જરા લક્ષમણ લખી દેજો
‘વફા’ના નામની સાથે અમે ધોખો નથી કરતાં
ખરેલાં અશ્રુઓમાં પ્રેમનું મિશ્રણ લખી દેજો
-મુહમ્મદઅલી વફા