एक झलक जिसने भी पायी आपकी

दोस्तों पेश करता हम एक ताज़ी ग़ज़ल और तस्वीर,
आपके प्रतिभाव की प्रतीक्षा सह….

एक झलक जिसने भी पायी आपकी
जिंन्दगी  कैसे जीये आरामकी
जो कला पहुचे नही उनके कदम
खाख है ऐसी कला बस नामकी 


लोग कहते है मुहब्बत है हमें
है बला बर्बाद, है क्या कामकी 

रातका तारा तू सपना भोर का
तू सुबह मेरी शफक तू शामकी 

मेंरी नझरो से उन्हें देखे कोई
क्या पड़े उनको जरूरत जामकी 

ख़ुदकुशी हो गई ख़ुशी ना पाई तो,
बात हमने ख़ास की ना आम की

प्यार से पायी ये हमने ज़िन्दगी
प्यारने ही ज़िन्दगी तम्माम की 

रात तकती राह, मिलने आयेगा
ज़िन्दगी ‘दिलीप’ तेरे नाम की 

-दिलीप गज्जर 

मौत एक कविता बनेगी

एक दिन हमतुम मिलेंगे तुम फिकर करना नहीं 
फूल कांटोमे भी खिलते आह तुम भरना नहीं

क्या अभी करती हो तुम मै गीत गाता सोचता, 
खुश रहेना तुम सदा उदास मन करना नहीं 

प्यार के तेरे सहारे झिन्दगी ये जा रही 
भर दिया दिलका ये सागर और कुछ भरना नहीं

रागद्वेषो के झहर, यमुना विषैली हो गई
विश्वमें मानव्यता सा कोई भी झरना नहीं

प्यार देना प्यार लेना, प्यार से जग देखना
हो सके इन्सान बनना और कुछ करना नहीं

ध्यान है तो है सभी कुछ, घ्यान ना तो कुछ नही
तु जो है तो है सभी कुछ, और कुछ स्मरना नही

कोई भला बुरा समझता कोई दिवाना दंभी पर
बंदे से कहता खूदा परवाह तुं करना नहीं

इस जमीं पर हो न हो तु कल्पनाकी है परी !
यह कविकी कल्पनाका ध्यान कुछ धरना नहीं

झिन्दगी को पानेकी किंमत दिलीप पहचान ले,
मौत एक कविता बनेगी मौत से डरना नहीं
-दिलीप गज्जर

उन्नत मानव जीवन-दिलीप गज्जर

उन्नत मानव जीवन
मानवताका   बीज  हृदयमे   जब   अंकुरित  होता   है
सृष्टिबागमे   मानव  जीवन   तब  विकसित   होता  है
चित्त  वृत्तिके   रंगीन   पत्ते  पतजड़में  गिर जाते  फिर
नए  गुणों  की बहारसे तरु   नवपल्लवित   होता   है
कृतज्ञता  और  भाव पूर्णता,  कार्य प्रवणता, अस्मिता
दैवी  गुणसे   मानव   सच्चा  मानव  साबित  होता  है
ऊँची डिग्री नौकरी  अच्छी  जिससे  कमाई  ज्यादा  हो
जिव जगत जगदीश जानकर कौन सुशिक्षित  होता  है
मेरा  कुछ  भी  है  कहा  निर्लेप   करम  बस  भक्त  करे
इश्वर  से  पाया   जानकर   इश्वरको  अर्पित  होता   है
दुर्गुण  की  दुर्गंघ  छुपाने   दम्भी  चेहरा   खूब  सजाया
शीलकी   शुश्बुसे  ही   मानव   गौरवान्वित  होता   है
पथ्थर  पर ही  झूकने पर   दिल  पथ्थर  जैसा  हो  गया
दिलका  साज  बजे  तो  जीवन प्यारका गीत  होता है
सबकुछ  होने पर  भी  जीवन  झुठा  सपना  लगता  है
ढाई   अक्षर  कहनेवाला ही  एक मनमीत   होता   है

दिलीप गज्जर

Kankaria lake, Amdavad
photo DGajjar